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ट्रिब्यूनल आर्डर के विरूद्ध अपील नहीं करता आयकर विभाग: चौहान
आयकर अपीलीय अधिकरण का 78वा स्थापना दिवस
इंदौर. आयकर अपीलीय अधिकरण ने करदाताओं को सुलभ एवं सत्वर न्याय प्रदान करने के 78 वर्ष पुरे किए जाने पर इंदौर खंड पीठ में स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया. इसमें कई कार्यक्रम आयोजित किए गए. यह अधिकरण 78 वर्ष पूर्व सन 1941 से स्थापित किया गया था और आयकर संबंधित आवेदनों एवं अपील के निराकरण की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है.
78वे स्थापना दिवस समारोह की रूप रेखा माननीय न्यायिक सदस्य कुल भारत और लेखा सदस्य मनीष बोराड की मार्गदर्शन में हुए और अतिथि मुख्य आयकर आयुक्त अजय चौहान थे. इस कार्यक्रम में 75 वर्ष से अधिक आयु के 10 वरिष्ठ सीए एवं कर सलाहकारों का सम्मान किया जिसमे श्री मुंजाल, धनञ्जय दवे, बाबूलाल बंसल आदि थे जिन्होंने न्याय दिलाने में करदाता और सरकार दोनों को वर्षों तक अपनी सेवाएं दी.
मुख्य आयकर आयुक्त ने इस अवसर पर कहा की इस संस्था की खासियत है कि 92 प्रतिशत ट्रिब्यूनल आर्डर के विरुद्ध विभाग कोई अपील नहीं करता है और उन फैसलों को स्वीकार कर लेता है. केवल उन्हीं केसेस में अपील हाई कोर्ट में की जाती है जहा महत्वपूर्ण कानून सम्बंधित प्रश्न होता है. उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने यह सीमा तय कर दी है कि 50 लाख तक के कर तक के फैसलों में विभाग अधिकरण के फैसलों को स्वीकार कर आगे अपील नहीं करेगा जिससे न्यायपालिका को राहत मिलेगी.
अधिकरण की स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्णलेखा सदस्य मनीष बोराड ने बताया कि आयकर अपीलीय अधिकरण प्रत्यक्ष कर मुक़दमा प्रणाली में अंतिम तथ्य खोजी अधिकरण है तथा यह करदाताओं और प्रशासन के साथ दुरिगत संवाद रखकर व्यवस्था में विश्वास पैदा करने में सफल रहा है। अधिकरण की स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण है.
वरिष्ठ विधि सदस्य कुल भारत ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि तकनीकी रूप से कुशल उद्यमी तथा वैश्विक भारतीय सवोत्तम पक्ष पध्दतियों के बराबर न्याय प्रदान प्रणाली की मांग करते हैं. इन इक्कीसवीं शताब्दी के उद्यमियों की अपेक्षाओं को पूरा करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है.
्आर्थिक विकास में योगदानटैक्स बार कि ओर से अध्यक्ष सुभाष देशपांडे ने बताया कि मध्यप्रदेश में इंदौर शहर में खंडपीठ स्थापना को इस वर्ष 50 वर्ष पूर्ण हो रहे है और इंदौर के आर्थिक विकास में इस अधिकरण का बहुत बड़ा योगदान है. संचालन टैक्स बार के सहसचिव गिरीश अग्रवाल और अधिकरण की सुश्री सोनल नीमा हिंदी अनुवादक ने किया. इसमें पी.डी. नागर, विजय बंसल आदि मौजूद थे.


